Friday, June 3, 2016

मैं युवा हूॅं (कविता)

   
     मैं वो युवा हूॅं ,
     आरोप लगा है जो हम पर
     पथभ्रष्ट और गैर जिम्मेदार का,
     अब मिटाना है और बदलना है सोच सबका।
     मैं वो युवा हूँ,
     नई सोच नई कल्पना का है अभिमान
    ‘संघर्ष ही जीवन है’ ,यह है हमारा गान।
     मैं वो युवा हूँ,
     नई दिशा, नया मार्ग है अब हमारा
     नव तकनीक,नव मशाल,नव परिवर्तन का है नारा।  
     मैं वो युवा हूँ,
     कल था जिससे आज भी है और कल है हमारा
     ज्ञान के दीप से,प्रज्ज्वलित करना है जग सारा।
     मैं वो युवा हूँ,
     स्वच्छता, स्वास्थ्य व पर्यावरण के रक्षक बनेंगे,
     लिया है संकल्प यह, पीछे न अब हम हटेंगे।
     मैं वो युवा हूँ,
     सभी के साथ चलकर सामंजस्य बनाना है,
     युवा हैं हम और युवा का फर्ज निभाना है।
                             
                                                                                                      ----- अर्चना सिंह 'जया '

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