Sunday, October 2, 2016

हाड़ मॉंस का इंसान ( कविता )



 हाड़ मॉंस का था वो इंसान,
रौशन जिसके कर्म से है जहान।
प्रतिभा-निष्ठा कर देश के नाम
सुदृढ़ राष्ट् बनाने का था अभिमान।
भारत रत्नका मिला जिसे सम्मान
गूंजे जिसके स्वर कानों में
घर, मुहल्ले गली तमाम।
नारों से जागृत होता इंसान
जय जवान, जय किसान।
हाड़ मॉंस का था वो इंसान,
घड़ी, धोती, लाठी थी जिसकी पहचान
समय के पाबंद रहे सदा ही
लिया किए सदैव प्रभु का नाम।
प्रातः से सायं तक तत्पर रहे
लेते थे कोई विश्राम।
आजादी दिलवाई हमको
सत्य-अहिंसा की बाहें थाम।
हाड़ मॉंस का था वो इंसान।
मॉ के लाल थे दोनों सपूत
उन महापुरुषों का कर सम्मान।
सादा जीवन, उच्च विचार
स्वपन उनके चलो करें साकार।
हलधर बन धरती को गले लगाएॅ,
स्वदेशी बन खादी अपनाएॅ।
राष्ट्पिताको दो यूॅ सम्मान,
दो अक्टूबर को ही नहीं मा़त्र
आजीवन तक करो यह मंत्र जाप।
चलो मन में लाएॅ एक विचार
सत्यमेव जयतेसे गूजे संसार।
बापू-शास्त्री ने देकर योगदान,
मॉं के सपूतों ने रखा, देश का मान। 
हाड़ मॉंस के थे वे दोनों इंसान
रौशन कर गए ,देश का नाम।
       
                                ---  अर्चना सिंहजया

 लाल बहादुर शास्त्री जी व गाँधी जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि

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