भावांजलि

सागर ऊर्मि की तरह मानव हृदय में भी कई भाव उभरते हैं जिसे शब्दों में पिरोने की छोटी -सी कोशिश है। मेरी ‘भावांजलि ’ मे एकत्रित रचनाएॅं दोनों हाथों से आप सभी को समर्पित है। आशा करती हूॅं कि मेरा ये प्रयास आप के अंतर्मन को छू पाने में सफल होगा।

Saturday, August 8, 2026

ऐ 'भारत'तुझ पर नाज आज भी

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  https://www.zorbabooks.com/spotlight/archanasingh601gmail-com/poem/the-india-i-still-believe-in-%e0%a4%90-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a...
Friday, February 6, 2026

बारिश और हम तुम

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बारिश और हम तुम https://www.zorbabooks.com/spotlight/archanasingh601gmail-com/poem/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b6-%e0%a4%94%e...

ज़िंदगी सिखाती

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ज़िंदगी तेरा शुक्रिया, जो दिया जितना दिया,कर्ज कैसे हो अदा। जीवन मार्ग पर प्रशस्त करूँ, ले हृदय में प्रेम-सद्भाव-करुणा और दया। आजीवन जिंदगी ...
Thursday, May 15, 2025

आप्रेशन सिंदूर पर कविता वर्तमान परिस्थितियों को व्यक्त करती हुई।

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आतंकवादियों को ललकारने, दहशत दिल में जगाने आया 'आप्रेशन सिंदूर'। मां-बहन-बहुओं के आंसुओं का मान रख, हुंकार लगाने लो आ गया 'आप्रे...
Monday, August 26, 2024

चयनित रचनाएं

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Sunday, August 25, 2024

कैसी दरिंदगी

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मानव होकर मानवता को करते शर्मसार, हैवानियत दिखती तुम सब की आंखों में, चेहरे पर मुखौटे पहने घूमते हैं दरिंदे सरेआम।  कब तक छुपकर बैठे बेटी-बह...
Tuesday, August 20, 2024

अंधकार. में अंतर्मन

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वेदनाओं के भँवर में घिरता जाता है मन, गहन अंधकार में खोने लगता अंतर्मन। क्या करूँगी जन्म लेकर इस समाज में, कोई देखना ही नहीं चाहता मेरा मन द...
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