सागर ऊर्मि की तरह मानव हृदय में भी कई भाव उभरते हैं जिसे शब्दों में पिरोने की छोटी -सी कोशिश है। मेरी ‘भावांजलि ’ मे एकत्रित रचनाएॅं दोनों हाथों से आप सभी को समर्पित है। आशा करती हूॅं कि मेरा ये प्रयास आप के अंतर्मन को छू पाने में सफल होगा।
Friday, February 6, 2026
ज़िंदगी सिखाती
ज़िंदगी तेरा शुक्रिया,
जो दिया जितना दिया,कर्ज कैसे हो अदा।
जीवन मार्ग पर प्रशस्त करूँ,
ले हृदय में प्रेम-सद्भाव-करुणा और दया।
आजीवन जिंदगी सिखाती हमें,
ये है एक अद्भुत पाठशाला।
ज़िंदगी तेरा शुक्रिया,
मुश्किल वक्त में साथ मेरा दिया।
कभी तपती धूप में छाँव उम्मीद की,
औ' गम की बारिश में छतरी आत्मविश्वास की।
इक पहेली सी जब भी लगी ज़िंदगी,
मनोबल टूटने न दिया,ज़िंदगी तेरा शुक्रिया।
शिक्षाएं ज़िंदगी की होती अजीब,
गिर कर उठना सिखाती-ठोकर में संभलना।
आजीवन शिक्षा प्राप्त करता है मानव,
हर गलती से कुछ न कुछ सीखता ही है मानव।
शिक्षा संवारती है ज़िंदगी को,
धैर्य, मनोबल व आत्मविश्वास देती है सबको।